महाभारत 9.59.26
इत्युक्त्वा रथमास्थाय रौहिणेयः प्रतापवान्श्वेताभ्रशिखराकारः प्रययौ द्वारकां प्रति
ityuktvā rathamāsthāya rauhiṇeyaḥ pratāpavānśvetābhraśikharākāraḥ prayayau dvārakāṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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