महाभारत 9.59.27
पाञ्चालाश्च सवार्ष्णेयाः पाण्डवाश्च विशां पतेरामे द्वारवतीं याते नातिप्रमनसोऽभवन्
pāñcālāśca savārṣṇeyāḥ pāṇḍavāśca viśāṃ paterāme dvāravatīṃ yāte nātipramanaso'bhavan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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