महाभारत 9.6.29
मद्रराजो महाराज सिंहद्विरदविक्रमःविचरिष्यत्यभीः काले कालः क्रुद्धः प्रजास्विव
madrarājo mahārāja siṃhadviradavikramaḥvicariṣyatyabhīḥ kāle kālaḥ kruddhaḥ prajāsviva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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