महाभारत 9.60.10
वैरस्य च गतः पारं त्वमिहान्यैः सुदुर्गमम्अशक्यमेतदन्येन संपादयितुमीदृशम्
vairasya ca gataḥ pāraṃ tvamihānyaiḥ sudurgamamaśakyametadanyena saṃpādayitumīdṛśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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