महाभारत 9.60.19तदैवैष हतः पापो यदैव निरपत्रपःलुब्धः पापसहायश्च सुहृदां शासनातिगःtadaivaiṣa hataḥ pāpo yadaiva nirapatrapaḥlubdhaḥ pāpasahāyaśca suhṛdāṃ śāsanātigaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें