महाभारत 9.60.25
अर्धोन्नतशरीरस्य रूपमासीन्नृपस्य तत्क्रुद्धस्याशीविषस्येव च्छिन्नपुच्छस्य भारत
ardhonnataśarīrasya rūpamāsīnnṛpasya tatkruddhasyāśīviṣasyeva cchinnapucchasya bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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