महाभारत 9.60.2
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
हतं दुर्योधनं दृष्ट्वा भीमसेनेन संयुगेसिंहेनेव महाराज मत्तं वनगजं वने
hataṃ duryodhanaṃ dṛṣṭvā bhīmasenena saṃyugesiṃheneva mahārāja mattaṃ vanagajaṃ vane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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