महाभारत 9.60.46अभिमन्युश्च यद्बाल एको बहुभिराहवेत्वद्दोषैर्निहतः पाप तस्मादसि हतो रणेabhimanyuśca yadbāla eko bahubhirāhavetvaddoṣairnihataḥ pāpa tasmādasi hato raṇeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें