महाभारत 9.60.50
ससुहृत्सानुबन्धश्च स्वर्गं गन्ताहमच्युतयूयं विहतसंकल्पाः शोचन्तो वर्तयिष्यथ
sasuhṛtsānubandhaśca svargaṃ gantāhamacyutayūyaṃ vihatasaṃkalpāḥ śocanto vartayiṣyatha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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