महाभारत 9.62.28
सर्वथा ते महाबाहो गान्धार्याः क्रोधनाशनम्कर्तव्यं सात्वतश्रेष्ठ पाण्डवानां हितैषिणा
sarvathā te mahābāho gāndhāryāḥ krodhanāśanamkartavyaṃ sātvataśreṣṭha pāṇḍavānāṃ hitaiṣiṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें