महाभारत 9.62.36
ततस्तु यादवश्रेष्ठो धृतराष्ट्रमधोक्षजःपाणिमालम्ब्य राज्ञः स सस्वरं प्ररुरोद ह
tatastu yādavaśreṣṭho dhṛtarāṣṭramadhokṣajaḥpāṇimālambya rājñaḥ sa sasvaraṃ praruroda ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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