महाभारत 9.62.43
त्वया कालोपसृष्टेन लोभतो नापवर्जिताःतवापराधान्नृपते सर्वं क्षत्रं क्षयं गतम्
tvayā kālopasṛṣṭena lobhato nāpavarjitāḥtavāparādhānnṛpate sarvaṃ kṣatraṃ kṣayaṃ gatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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