महाभारत 9.62.60
शक्ता चासि महाभागे पृथिवीं सचराचराम्चक्षुषा क्रोधदीप्तेन निर्दग्धुं तपसो बलात्
śaktā cāsi mahābhāge pṛthivīṃ sacarācarāmcakṣuṣā krodhadīptena nirdagdhuṃ tapaso balāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें