महाभारत 9.63.30
वातिकांश्चाब्रवीद्राजा पुत्रस्ते सत्यविक्रमःअधर्माद्भीमसेनेन निहतोऽहं यथा रणे
vātikāṃścābravīdrājā putraste satyavikramaḥadharmādbhīmasenena nihato'haṃ yathā raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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