महाभारत 9.63.38
यदि जानाति चार्वाकः परिव्राड्वाग्विशारदःकरिष्यति महाभागो ध्रुवं सोऽपचितिं मम
yadi jānāti cārvākaḥ parivrāḍvāgviśāradaḥkariṣyati mahābhāgo dhruvaṃ so'pacitiṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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