महाभारत 9.63.3
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
शृणु राजन्प्रवक्ष्यामि यथावृत्तं नराधिपराज्ञा यदुक्तं भग्नेन तस्मिन्व्यसन आगते
śṛṇu rājanpravakṣyāmi yathāvṛttaṃ narādhiparājñā yaduktaṃ bhagnena tasminvyasana āgate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें