महाभारत 9.63.4
भग्नसक्थो नृपो राजन्पांसुना सोऽवगुण्ठितःयमयन्मूर्धजांस्तत्र वीक्ष्य चैव दिशो दश
bhagnasaktho nṛpo rājanpāṃsunā so'vaguṇṭhitaḥyamayanmūrdhajāṃstatra vīkṣya caiva diśo daśa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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