महाभारत 9.64.10
अवतीर्य रथेभ्यस्तु प्राद्रवन्राजसंनिधौदुर्योधनं च संप्रेक्ष्य सर्वे भूमावुपाविशन्
avatīrya rathebhyastu prādravanrājasaṃnidhauduryodhanaṃ ca saṃprekṣya sarve bhūmāvupāviśan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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