महाभारत 9.64.32
स तु क्रोधसमाविष्टः पाणौ पाणिं निपीड्य चबाष्पविह्वलया वाचा राजानमिदमब्रवीत्
sa tu krodhasamāviṣṭaḥ pāṇau pāṇiṃ nipīḍya cabāṣpavihvalayā vācā rājānamidamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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