महाभारत 9.64.37
स तद्वचनमाज्ञाय राज्ञो ब्राह्मणसत्तमःकलशं पूर्णमादाय राज्ञोऽन्तिकमुपागमत्
sa tadvacanamājñāya rājño brāhmaṇasattamaḥkalaśaṃ pūrṇamādāya rājño'ntikamupāgamat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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