महाभारत 9.8.9
तथा च रथिनं क्रुद्धं विकिरन्तं शरान्बहून्नागा जघ्नुर्महाराज परिवार्य समन्ततः
tathā ca rathinaṃ kruddhaṃ vikirantaṃ śarānbahūnnāgā jaghnurmahārāja parivārya samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें