महाभारत 9.9.26
ततः प्रहस्य नकुलश्चतुर्भिश्चतुरो रणेजघान निशितैस्तीक्ष्णैः सत्यसेनस्य वाजिनः
tataḥ prahasya nakulaścaturbhiścaturo raṇejaghāna niśitaistīkṣṇaiḥ satyasenasya vājinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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