Loading
महाभारत 9.9.3
अत्र मां प्रापय क्षिप्रं पश्य मे सारथे बलम्न समर्था हि मे पार्थाः स्थातुमद्य पुरो युधि
atra māṃ prāpaya kṣipraṃ paśya me sārathe balamna samarthā hi me pārthāḥ sthātumadya puro yudhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें