महाभारत 9.9.9
तौ परस्परमासाद्य चित्रकार्मुकधारिणौमेघाविव यथोद्वृत्तौ दक्षिणोत्तरवर्षिणौ
tau parasparamāsādya citrakārmukadhāriṇaumeghāviva yathodvṛttau dakṣiṇottaravarṣiṇau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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