ऋग्वेद 1.100.13
यस्याज॑स्रं॒ शव॑सा॒ मान॑मु॒क्थं प॑रिभु॒जद् रोद॑सी वि॒श्वत॑: सीम् ।स पा॑रिष॒त् क्रतु॑भिर्मन्दसा॒नो म॒रुत्वा॑न् नो भव॒त्विन्द्र॑ ऊ॒ती॥
yasyājasraṃ śavasā mānamukthaṃ paribhujad rodasī viśvata: sīm |sa pāriṣat kratubhirmandasāno marutvān no bhavatvindra ūtī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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