ऋग्वेद 1.102.11
वि॒श्वाहेन्द्रो॑ अधिव॒क्ता नो॑ अ॒स्त्वप॑रिह्वृताः सनुयाम॒ वाज॑म् ।तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑ति॒: सिन्धु॑: पृथि॒वी उ॒त द्यौः॥
viśvāhendro adhivaktā no astvaparihvṛtāḥ sanuyāma vājam |tanno mitro varuṇo māmahantāmaditi: sindhu: pṛthivī uta dyauḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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