ऋग्वेद 1.120.6
श्रु॒तं गा॑य॒त्रं तक॑वानस्या॒हं चि॒द्धि रि॒रेभा॑श्विना वाम् ।आक्षी शु॑भस्पती॒ दन्॥
śrutaṃ gāyatraṃ takavānasyāhaṃ ciddhi rirebhāśvinā vām |ākṣī śubhaspatī dan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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