ऋग्वेद 1.120.9
दु॒ही॒यन् मि॒त्रधि॑तये यु॒वाकु॑ रा॒ये च॑ नो मिमी॒तं वाज॑वत्यै ।इ॒षे च॑ नो मिमीतं धेनु॒मत्यै॑॥
duhīyan mitradhitaye yuvāku rāye ca no mimītaṃ vājavatyai |iṣe ca no mimītaṃ dhenumatyai ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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