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ऋग्वेद 1.14.11
त्वं होता॒ मनु॑र्हि॒तो ऽग्ने॑ य॒ज्ञेषु॑ सीदसि ।सेमं नो॑ अध्व॒रं य॑ज॥
tvaṃ hotā manurhito 'gne yajñeṣu sīdasi |semaṃ no adhvaraṃ yaja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंत्वं होता॒ मनु॑र्हि॒तो ऽग्ने॑ य॒ज्ञेषु॑ सीदसि ।सेमं नो॑ अध्व॒रं य॑ज॥
tvaṃ hotā manurhito 'gne yajñeṣu sīdasi |semaṃ no adhvaraṃ yaja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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