ऋग्वेद 1.14.3इ॒न्द्र॒वा॒यू बृह॒स्पतिं॑ मि॒त्राग्निं पू॒षणं॒ भग॑म् ।आ॒दि॒त्यान् मारु॑तं ग॒णम्॥indravāyū bṛhaspatiṃ mitrāgniṃ pūṣaṇaṃ bhagam |ādityān mārutaṃ gaṇam ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें