ऋग्वेद 1.163.8
अनु॑ त्वा॒ रथो॒ अनु॒ मर्यो॑ अर्व॒न्ननु॒ गावोऽनु॒ भग॑: क॒नीना॑म् ।अनु॒ व्राता॑स॒स्तव॑ स॒ख्यमी॑यु॒रनु॑ दे॒वा म॑मिरे वी॒र्यं॑ ते॥
anu tvā ratho anu maryo arvannanu gāvo'nu bhaga: kanīnām |anu vrātāsastava sakhyamīyuranu devā mamire vīryaṃ te ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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