ऋग्वेद 1.165.14
आ यद् दु॑व॒स्याद् दु॒वसे॒ न का॒रुर॒स्माञ्च॒क्रे मा॒न्यस्य॑ मे॒धा ।ओ षु व॑र्त्त मरुतो॒ विप्र॒मच्छे॒मा ब्रह्मा॑णि जरि॒ता वो॑ अर्चत्॥
ā yad duvasyād duvase na kārurasmāñcakre mānyasya medhā |o ṣu vartta maruto vipramacchemā brahmāṇi jaritā vo arcat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें