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ऋग्वेद 1.22.15
स्यो॒ना पृ॑थिवि भवानृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी ।यच्छा॑ न॒: शर्म॑ स॒प्रथ॑:॥
syonā pṛthivi bhavānṛkṣarā niveśanī |yacchā na: śarma sapratha: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंस्यो॒ना पृ॑थिवि भवानृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी ।यच्छा॑ न॒: शर्म॑ स॒प्रथ॑:॥
syonā pṛthivi bhavānṛkṣarā niveśanī |yacchā na: śarma sapratha: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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