ऋग्वेद 1.69.1
पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। · parāśaraḥ śāktyaḥ | agniḥ | dvipadā virāṭ |
शु॒क्रः शु॑शु॒क्वाँ, उ॒षो न जा॒रः प॒प्रा स॑मी॒ची, दि॒वो न ज्योति॑:॥
śukraḥ śuśukvām̐, uṣo na jāraḥ paprā samīcī, divo na jyoti: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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