ऋग्वेद 1.82.4
स घा॒ तं वृष॑णं॒ रथ॒मधि॑ तिष्ठाति गो॒विद॑म् ।यः पात्रं॑ हारियोज॒नं पू॒र्णमि॑न्द्र॒ चिके॑तति॒ योजा॒ न्वि॑न्द्र ते॒ हरी॑॥
sa ghā taṃ vṛṣaṇaṃ rathamadhi tiṣṭhāti govidam |yaḥ pātraṃ hāriyojanaṃ pūrṇamindra ciketati yojā nvindra te harī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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