Loading
ऋग्वेद 10.118.6
तं म॑र्ता॒ अम॑र्त्यं घृ॒तेना॒ग्निं स॑पर्यत ।अदा॑भ्यं गृ॒हप॑तिम्॥
taṃ martā amartyaṃ ghṛtenāgniṃ saparyata |adābhyaṃ gṛhapatim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतं म॑र्ता॒ अम॑र्त्यं घृ॒तेना॒ग्निं स॑पर्यत ।अदा॑भ्यं गृ॒हप॑तिम्॥
taṃ martā amartyaṃ ghṛtenāgniṃ saparyata |adābhyaṃ gṛhapatim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें