ऋग्वेद 10.118.9तं त्वा॑ गी॒र्भिरु॑रु॒क्षया॑ हव्य॒वाहं॒ समी॑धिरे ।यजि॑ष्ठं॒ मानु॑षे॒ जने॑॥taṃ tvā gīrbhirurukṣayā havyavāhaṃ samīdhire |yajiṣṭhaṃ mānuṣe jane ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें