ऋग्वेद 10.125.6
अ॒हं रु॒द्राय॒ धनु॒रा त॑नोमि ब्रह्म॒द्विषे॒ शर॑वे॒ हन्त॒वा उ॑ ।अ॒हं जना॑य स॒मदं॑ कृणोम्य॒हं द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश॥
ahaṃ rudrāya dhanurā tanomi brahmadviṣe śarave hantavā u |ahaṃ janāya samadaṃ kṛṇomyahaṃ dyāvāpṛthivī ā viveśa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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