ऋग्वेद 10.126.6
नेता॑र ऊ॒ षु ण॑स्ति॒रो वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा ।अति॒ विश्वा॑नि दुरि॒ता राजा॑नश्चर्षणी॒नामति॒ द्विष॑:॥
netāra ū ṣu ṇastiro varuṇo mitro aryamā |ati viśvāni duritā rājānaścarṣaṇīnāmati dviṣa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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