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ऋग्वेद 10.127.8
उप॑ ते॒ गा इ॒वाक॑रं वृणी॒ष्व दु॑हितर्दिवः ।रात्रि॒ स्तोमं॒ न जि॒ग्युषे॑॥
upa te gā ivākaraṃ vṛṇīṣva duhitardivaḥ |rātri stomaṃ na jigyuṣe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंउप॑ ते॒ गा इ॒वाक॑रं वृणी॒ष्व दु॑हितर्दिवः ।रात्रि॒ स्तोमं॒ न जि॒ग्युषे॑॥
upa te gā ivākaraṃ vṛṇīṣva duhitardivaḥ |rātri stomaṃ na jigyuṣe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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