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ऋग्वेद 10.20.7
य॒ज्ञा॒साहं॒ दुव॑ इषे॒ऽग्निं पूर्व॑स्य॒ शेव॑स्य ।अद्रे॑: सू॒नुमा॒युमा॑हुः॥
yajñāsāhaṃ duva iṣe'gniṃ pūrvasya śevasya |adre: sūnumāyumāhuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंय॒ज्ञा॒साहं॒ दुव॑ इषे॒ऽग्निं पूर्व॑स्य॒ शेव॑स्य ।अद्रे॑: सू॒नुमा॒युमा॑हुः॥
yajñāsāhaṃ duva iṣe'gniṃ pūrvasya śevasya |adre: sūnumāyumāhuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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