ऋग्वेद 10.20.9
कृ॒ष्णः श्वे॒तो॑ऽरु॒षो यामो॑ अस्य ब्र॒ध्न ऋ॒ज्र उ॒त शोणो॒ यश॑स्वान् ।हिर॑ण्यरूपं॒ जनि॑ता जजान॥
kṛṣṇaḥ śveto'ruṣo yāmo asya bradhna ṛjra uta śoṇo yaśasvān |hiraṇyarūpaṃ janitā jajāna ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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