Loading
ऋग्वेद 10.35.8
पिप॑र्तु मा॒ तदृ॒तस्य॑ प्र॒वाच॑नं दे॒वानां॒ यन्म॑नु॒ष्या॒३ अम॑न्महि ।विश्वा॒ इदु॒स्राः स्पळुदे॑ति॒ सूर्य॑: स्व॒स्त्य१ग्निं स॑मिधा॒नमी॑महे॥
pipartu mā tadṛtasya pravācanaṃ devānāṃ yanmanuṣyā3 amanmahi |viśvā idusrāḥ spaḷudeti sūrya: svastya1gniṃ samidhānamīmahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें