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ऋग्वेद 10.57.4
आ त॑ एतु॒ मन॒: पुन॒: क्रत्वे॒ दक्षा॑य जी॒वसे॑ ।ज्योक्च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे॥
ā ta etu mana: puna: kratve dakṣāya jīvase |jyokca sūryaṃ dṛśe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंआ त॑ एतु॒ मन॒: पुन॒: क्रत्वे॒ दक्षा॑य जी॒वसे॑ ।ज्योक्च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे॥
ā ta etu mana: puna: kratve dakṣāya jīvase |jyokca sūryaṃ dṛśe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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