ऋग्वेद 10.85.9
सोमो॑ वधू॒युर॑भवद॒श्विना॑स्तामु॒भा व॒रा ।सू॒र्यां यत्पत्ये॒ शंस॑न्तीं॒ मन॑सा सवि॒ताद॑दात्॥
somo vadhūyurabhavadaśvināstāmubhā varā |sūryāṃ yatpatye śaṃsantīṃ manasā savitādadāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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