ऋग्वेद 2.6.8स वि॒द्वाँ आ च॑ पिप्रयो॒ यक्षि॑ चिकित्व आनु॒षक् ।आ चा॒स्मिन् त्स॑त्सि ब॒र्हिषि॑॥sa vidvām̐ ā ca piprayo yakṣi cikitva ānuṣak |ā cāsmin tsatsi barhiṣi ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें