Loading
ऋग्वेद 3.62.14
सोमो॑ अ॒स्मभ्यं॑ द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे च प॒शवे॑ ।अ॒न॒मी॒वा इष॑स्करत्॥
somo asmabhyaṃ dvipade catuṣpade ca paśave |anamīvā iṣaskarat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसोमो॑ अ॒स्मभ्यं॑ द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे च प॒शवे॑ ।अ॒न॒मी॒वा इष॑स्करत्॥
somo asmabhyaṃ dvipade catuṣpade ca paśave |anamīvā iṣaskarat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें