ऋग्वेद 4.11.3
त्वद॑ग्ने॒ काव्या॒ त्वन्म॑नी॒षास्त्वदु॒क्था जा॑यन्ते॒ राध्या॑नि ।त्वदे॑ति॒ द्रवि॑णं वी॒रपे॑शा इ॒त्थाधि॑ये दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य॥
tvadagne kāvyā tvanmanīṣāstvadukthā jāyante rādhyāni |tvadeti draviṇaṃ vīrapeśā itthādhiye dāśuṣe martyāya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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