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ऋग्वेद 4.31.15
अ॒स्माक॑मुत्त॒मं कृ॑धि॒ श्रवो॑ दे॒वेषु॑ सूर्य ।वर्षि॑ष्ठं॒ द्यामि॑वो॒परि॑॥
asmākamuttamaṃ kṛdhi śravo deveṣu sūrya |varṣiṣṭhaṃ dyāmivopari ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअ॒स्माक॑मुत्त॒मं कृ॑धि॒ श्रवो॑ दे॒वेषु॑ सूर्य ।वर्षि॑ष्ठं॒ द्यामि॑वो॒परि॑॥
asmākamuttamaṃ kṛdhi śravo deveṣu sūrya |varṣiṣṭhaṃ dyāmivopari ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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