ऋग्वेद 5.52.11
अधा॒ नरो॒ न्यो॑ह॒तेऽधा॑ नि॒युत॑ ओहते ।अधा॒ पारा॑वता॒ इति॑ चि॒त्रा रू॒पाणि॒ दर्श्या॑॥
adhā naro nyohate'dhā niyuta ohate |adhā pārāvatā iti citrā rūpāṇi darśyā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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